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दुनिया की कोई भी चीज़ स्थिर नहीं है. हर चीज़ बदलती हैऔर इसी लिए कोई भी परिस्थिति हमेशा बनी नहीं रहती. कोई भी व्यवस्था चिर नहीं होती, वह समाज और उत्पादक शक्तियों के विकास के साथ अभिन्न रूप से जुडी होती है.

हम इस आयोजन के ज़रिये यह जानने की कोशिश करेंगे कि मनुष्य ने अब तक का अपना सफ़र कैसे तय किया है, दर्शनों का विकास किस तरह हुआ है, विचारधाराएं किस तरह जन्मीं और फैलीं और क्यों अप्रभावी हो गयीं. इसी के साथ हम मार्क्सवाद के बारे में विस्तार से जानेंगे. हम इस दर्शन के हर आयाम पर विस्तार से चर्चा करेंगे.

[यह ब्लाग अभी शुरुआती स्वरूप में है. आपके सुझावों का स्वागत है.]

प्रतिदावा : इस ब्लाग का दिल्ली से प्रकाशित पत्रिका समयांतर से कोई संबंध नहीं है.

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रेयाज़-उल-हक
प्रभात खबर
पुराना बाइपास रोड
कंकड़बाग
पटना-20, बिहार

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One Response

  1. रेयाज़ भाई,
    यहा आता रहा हूं। हाशिये पर भी। क्या आपके इस प्रयास में शब्दों की भी कुछ अहमियत है ? अगर सोचते हैं कि समाज के विकास में शब्दों का भी योगदान है तो हाशिये पर शब्दों के सफर का लिंक दे सकते हैं। मेरा भी एक छोटा सा प्रयास है।
    शुभकामनाओं सहित

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