ए खाकनशीनों उठ बैठो
September 21, 2007 - No Responses
रात ढलने लगी है सीनों में
आग सुलगाओ आबगीनों में
दिले उश्शाक की खबर लेना
फूल खिलते हैं इन महीनों में .
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दरबारे वतन में इक दिन सब जाने वाले जायेंगे
कुछ अपनी सजा को पहुंचेंगे कुछ अपनी जज़ा ले जायेंगे
ऐ खाकनशीनों उठ बैठो वो वक्त करीब आ पहुंचा है
जब तख्त उछाले जायेंगे जब ताज गिराए जायेंगे .